Saturday, 21 February 2026

मुन्ना भाई एमबीबीएस के दौरान बदली किस्मत, अरशद वारसी ने किया बड़ा खुलासा


 बॉलीवुड अभिनेता Arshad Warsi ने हाल ही में खुलासा किया कि उन्होंने फिल्म Munna Bhai M.B.B.S. में ‘सर्किट’ का किरदार किसी खास योजना के तहत नहीं, बल्कि मजबूरी में किया था।

अरशद ने बताया कि उस समय उनके पास ज्यादा काम नहीं था और वे ऐसी स्थिति में नहीं थे कि प्रोजेक्ट ठुकरा सकें। उन्होंने कहा कि आर्थिक और पेशेवर हालात ऐसे थे कि जो अच्छा काम मिला, उसे स्वीकार करना ही बेहतर विकल्प था।

फिल्म में सर्किट का किरदार दर्शकों को इतना पसंद आया कि वह आज भी उनके करियर की पहचान बना हुआ है। Sanjay Dutt के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब सराहा।

अरशद के मुताबिक, इसी फिल्म के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि उनकी मार्केट वैल्यू बदल चुकी है। उन्होंने बताया कि ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ की सफलता के बाद वे 1 करोड़ रुपये तक की फीस चार्ज करने की स्थिति में आ गए थे।

राजकुमार हिरानी के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता पाई, बल्कि अरशद वारसी को भी इंडस्ट्री में नई पहचान दिलाई। ‘सर्किट’ का किरदार आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार कॉमिक किरदारों में गिना जाता है।

अरशद वारसी का यह बयान बताता है कि कभी-कभी मजबूरी में लिया गया फैसला भी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बन जाता है।

IMD Rainfall Alert: 21–22 फरवरी को दक्षिण भारत में भारी बारिश की चेतावनी


  भारत मौसम विज्ञान विभाग India Meteorological Department (IMD) ने दक्षिण भारत के कई हिस्सों में 21 और 22 फरवरी को बारिश का अलर्ट जारी किया है।

  • Tamil Nadu के दक्षिणी जिलों में 21 व 22 फरवरी को भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

  • Kerala और माहे में इन दो दिनों के दौरान छिटपुट से लेकर काफी जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

IMD के अनुसार, केरल और आसपास के क्षेत्रों में 30–40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। समुद्री इलाकों में रहने वाले लोगों और मछुआरों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

  • खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें।

  • बिजली गिरने की आशंका वाले क्षेत्रों में खुले स्थानों पर न रुकें।

  • मछुआरे समुद्र में जाने से पहले स्थानीय प्रशासन की सलाह जरूर लें।

IMD ने बताया है कि मौसम में यह बदलाव क्षेत्र में सक्रिय निम्न दबाव प्रणाली और नमी के कारण हो रहा है। स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है और जरूरत पड़ने पर राहत व्यवस्था सक्रिय की जाएगी।

गौ रक्षा को लेकर ‘धर्म युद्ध’ का ऐलान, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने जारी किया पोस्टर


 प्रयागराज। माघ मेला विवाद के बाद अब गौ रक्षा के मुद्दे पर Swami Avimukteshwaranand Saraswati एक बार फिर चर्चा में हैं। शंकराचार्य ने एक पोस्टर जारी कर ‘धर्म युद्ध’ का ऐलान किया है और 1 मार्च को औपचारिक घोषणा करने की बात कही है।

जारी पोस्टर में महाभारत की शैली में दो पक्ष दर्शाए गए हैं—

  • एक ओर गौ रक्षा के समर्थन में खड़े लोग

  • दूसरी ओर विरोध करने वालों को दिखाया गया है

शंकराचार्य ने इसे धर्म और अधर्म के बीच की लड़ाई बताया है। उनके मुताबिक, यह अभियान गौ रक्षा के समर्थन में जनजागरण के उद्देश्य से चलाया जाएगा।

पोस्टर में Ravindra Puri, जो Akhil Bharatiya Akhara Parishad के अध्यक्ष हैं, को विपक्ष की सूची में दर्शाया गया है। शंकराचार्य ने उन्हें ‘कालनेमि’ की संज्ञा दी है।

इस कदम के बाद साधु-संत समाज में मतभेद की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।

गौ रक्षा के मुद्दे पर यह पोस्टर सामने आने के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। समर्थक इसे आस्था और परंपरा की रक्षा का अभियान बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे अनावश्यक टकराव की स्थिति मान रहे हैं।

फिलहाल, 1 मार्च को प्रस्तावित घोषणा के बाद इस मामले की दिशा और स्पष्ट हो पाएगी।

क्या अमेरिकी कोर्ट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सजा दे सकता है?


 हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा Donald Trump की वैश्विक टैरिफ नीति को रद्द किए जाने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका की अदालतें किसी मौजूदा राष्ट्रपति को सजा भी सुना सकती हैं? आइए अमेरिकी संविधान की व्यवस्था को सरल भाषा में समझते हैं।

अमेरिका का संविधान (U.S. Constitution) तीन स्तंभों पर आधारित है—

  1. कार्यपालिका (President)

  2. विधायिका (Congress)

  3. न्यायपालिका (Courts)

इनके बीच Checks and Balances की व्यवस्था है, यानी कोई भी शाखा पूरी तरह सर्वोच्च नहीं है।

अगर राष्ट्रपति का कोई आदेश संविधान के खिलाफ पाया जाता है, तो Supreme Court of the United States उसे रद्द कर सकता है। यही हालिया टैरिफ मामले में हुआ।

यह विषय अमेरिका में बहस का मुद्दा रहा है।

  • अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) की पुरानी राय रही है कि पद पर रहते हुए राष्ट्रपति पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए

  • लेकिन यह स्पष्ट रूप से संविधान में लिखा नहीं है—यह व्याख्या पर आधारित है।

अगर किसी राष्ट्रपति पर गंभीर आरोप हों, तो कार्रवाई का पहला कदम अदालत नहीं बल्कि United States Congress उठाती है।

रंगभरी एकादशी 2026: कब है, क्यों खास है यह व्रत?


  Rangbhari Ekadashi 2026 Date: फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली रंगभरी एकादशी रंग और गुलाल से जुड़ा अनूठा पर्व है। आमतौर पर सभी एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होते हैं, लेकिन इस दिन पूजा होती है भगवान शिव और माता पार्वती की। यही वजह है कि यह तिथि विशेष रूप से काशी में भव्य रूप से मनाई जाती है।

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल एकादशी तिथि का प्रारंभ 27 फरवरी 2026 (शुक्रवार) को रात 12:33 बजे होगा और उसी दिन रात 10:32 बजे समाप्त हो जाएगी।
उदयातिथि के आधार पर रंगभरी एकादशी 27 फरवरी 2026 को ही मनाई जाएगी।

जहां अन्य एकादशी व्रतों में भगवान विष्णु की आराधना की जाती है, वहीं रंगभरी एकादशी शिव-पार्वती को समर्पित है। मान्यता है कि विवाह के बाद माता पार्वती पहली बार काशी आई थीं। उसी अवसर की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है।

काशी में स्थित Kashi Vishwanath Temple में इस दिन बाबा विश्वनाथ और माता गौरी का विशेष श्रृंगार होता है। उन्हें अबीर-गुलाल अर्पित किया जाता है और फिर भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। श्रद्धालु रंग और गुलाल से शिव-शक्ति का स्वागत करते हैं।

Friday, 20 February 2026

इंदौर का जैविक ग्रामीण हाट बाजार: हर वीकेंड ताजी ऑर्गेनिक सब्जियां, नोट करें दिन और समय


 Indore में अगर आप ताजी और जैविक सब्जियां खरीदना चाहते हैं, तो ग्रामीण हाट बाजार आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यहां सीधे खेतों से लाई गई ऑर्गेनिक सब्जियां और फल बिना किसी बिचौलिए के ग्राहकों तक पहुंचते हैं। यह बाजार ढक्कन वाला कुआं क्षेत्र में आयोजित किया जाता है और हर सप्ताह बड़ी संख्या में लोग यहां खरीदारी के लिए पहुंचते हैं।

कृषि विभाग की अधिकारी शैली थॉमस के अनुसार, जैविक और प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को एक सीधा मंच देना जरूरी था। इसी उद्देश्य से जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने इस ग्रामीण हाट बाजार की शुरुआत की, ताकि किसान अपनी उपज सीधे ग्राहकों को बेच सकें और उचित दाम पा सकें।

यह बाजार हर शनिवार और रविवार दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक खुलता है। यहां सिर्फ ताजी सब्जियां और फल ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक तरीके से उगाई और तैयार की गई हल्दी, पोहा, मिलेट्स और अन्य उत्पाद भी उपलब्ध रहते हैं।

स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग अब रासायनिक खाद और कीटनाशकों से उगाई गई सब्जियों से दूरी बना रहे हैं। ऐसे में यह जैविक बाजार उपभोक्ताओं और किसानों दोनों के लिए लाभदायक साबित हो रहा है।

पहाड़ों में उगने वाली ‘निर्गुंडी’ का कमाल! पैरालिसिस, सूजन और दर्द में देसी नुस्खा


  Sidhi जिले के विंध्य क्षेत्र की पहाड़ियों में उगने वाला निर्गुंडी पौधा इन दिनों चर्चा में है। स्थानीय लोग इसे औषधीय गुणों से भरपूर मानते हैं और पारंपरिक इलाज में इसका व्यापक उपयोग करते हैं। आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह के मुताबिक, निर्गुंडी के पत्तों में कई ऐसे गुण पाए जाते हैं जो सूजन, दर्द और संक्रमण में लाभकारी माने जाते हैं।

डॉ. सिंह ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार तीन सप्ताह तक रोजाना निर्गुंडी के पत्तों से ‘झलकी’ यानी हवा दी जाए, तो पक्षाघात (पैरालिसिस) के लक्षणों में धीरे-धीरे सुधार देखा जा सकता है। इस प्रक्रिया में प्रभावित अंगों पर पत्तों से नियमित रूप से हवा दी जाती है। ग्रामीणों का मानना है कि इससे नसों में संचार बेहतर होता है और जकड़न कम होती है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से निर्गुंडी में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल और दर्द निवारक गुण पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसका उपयोग जोड़ों के दर्द, सूजन और अन्य शारीरिक तकलीफों में किया जाता रहा है। कई आयुर्वेदिक औषधियों में भी इसे प्रमुख घटक के रूप में शामिल किया जाता है।

हालांकि, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में पैरालिसिस पर इसके प्रभाव को लेकर व्यापक वैज्ञानिक पुष्टि सीमित है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गंभीर बीमारियों में किसी भी घरेलू या पारंपरिक उपचार को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

प्ले स्कूल की फीस पर बवाल: IIT बॉम्बे ग्रेजुएट बोला— 4 साल की इंजीनियरिंग से महंगी नर्सरी!



  मुंबई में प्ले स्कूलों की बढ़ती फीस को लेकर सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई है। Indian Institute of Technology Bombay (IIT बॉम्बे) से पासआउट एक पूर्व छात्र ने दावा किया है कि उसकी चार साल की इंजीनियरिंग की कुल फीस, शहर के एक नामी प्ले स्कूल की एक साल की फीस से भी कम थी। यह टिप्पणी सामने आते ही इंटरनेट पर चर्चा तेज हो गई।

ग्रेजुएट ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि उसने IIT बॉम्बे में पढ़ाई के दौरान जितनी फीस चार साल में चुकाई, उससे लगभग दोगुनी रकम आज एक प्री-स्कूल एक साल के लिए वसूल रहा है। इसके बाद कई अभिभावकों ने भी निजी स्कूलों की बढ़ती फीस, एडमिशन चार्ज, एक्टिविटी फीस और अन्य अतिरिक्त खर्चों पर सवाल उठाए।

कुछ यूजर्स का कहना है कि महानगरों में प्री-स्कूल अब ‘ब्रांडेड एजुकेशन’ का हिस्सा बन गए हैं, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर, एयर-कंडीशंड क्लासरूम और इंटरनेशनल करिकुलम के नाम पर भारी शुल्क लिया जाता है। वहीं, कई लोगों ने तर्क दिया कि उच्च शिक्षा संस्थानों को सरकारी सब्सिडी मिलती है, जबकि निजी प्ले स्कूल पूरी तरह निजी निवेश पर चलते हैं, इसलिए तुलना पूरी तरह समान नहीं है।

फिलहाल यह मुद्दा ऑनलाइन बहस का विषय बना हुआ है और अभिभावक शिक्षा की बढ़ती लागत पर चिंता जता रहे हैं।

गाजा पुनर्निर्माण के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत पर्यवेक्षक के रूप में शामिल, वॉशिंगटन में उपराजदूत ने किया प्रतिनिधित्व


 Donald Trump द्वारा गाजा के पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत ने प्रत्यक्ष सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भागीदारी की। इस पहल का उद्देश्य संघर्ष प्रभावित गाजा क्षेत्र में पुनर्निर्माण, मानवीय सहायता और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना बताया गया है।

भारत की ओर से वॉशिंगटन डीसी में उपराजदूत नामग्या सी खंपा ने बैठक में हिस्सा लिया। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, भारत ने क्षेत्र में स्थिरता, मानवीय सहायता और दीर्घकालिक शांति प्रयासों का समर्थन दोहराया, लेकिन औपचारिक सदस्यता से दूरी बनाए रखी। भारत परंपरागत रूप से पश्चिम एशिया के मुद्दों पर संतुलित और स्वतंत्र रुख अपनाता रहा है।

‘बोर्ड ऑफ पीस’ को गाजा में पुनर्निर्माण परियोजनाओं, वित्तीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के समन्वय के मंच के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि इस पहल को लेकर अलग-अलग देशों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और इसकी संरचना व अधिकार-क्षेत्र को लेकर भी चर्चा जारी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यवेक्षक के रूप में शामिल होकर भारत ने कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है, जिससे वह मानवीय प्रयासों का समर्थन भी कर सके और क्षेत्रीय जटिलताओं से सीधे तौर पर न जुड़े।

महाराष्ट्र में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म का मामला, तीन आरोपी गिरफ्तार; ‘लव जिहाद’ एंगल की भी जांच


 Maharashtra के Ahilyanagar जिले के Rahuri क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार 15 वर्षीय एक लड़की का कथित रूप से अपहरण कर उसे जंगल में ले जाया गया, जहां पांच दिनों तक उसके साथ दुष्कर्म किया गया। इस घटना के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा गया है और उसके बयान के आधार पर आगे की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है।

स्थानीय स्तर पर कुछ संगठनों ने इस घटना में ‘लव जिहाद’ का एंगल होने का आरोप लगाया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि फिलहाल मामले की जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की पुष्टि की जाएगी।

प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। वहीं, परिजनों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को कानून के मुताबिक कड़ी सजा दिलाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

‘वेश्यावृत्ति सामाजिक सेवा है’— अभिनेत्री मोना थीबा के बयान पर बवाल, माफी की मांग तेज


 गुजराती फिल्म इंडस्ट्री की अभिनेत्री Mona Thiba के एक बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है। राजकोट में अपनी आगामी फिल्म के प्रमोशन के दौरान उन्होंने कहा कि “वेश्यावृत्ति एक प्रकार की सामाजिक सेवा है” और इससे जुड़ी महिलाएं परोक्ष रूप से समाज की मदद करती हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न संगठनों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

अभिनेत्री के अनुसार, यदि यह पेशा न हो तो समाज में गंभीर अपराधों में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, उनके इस तर्क की कई सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों ने कड़ी आलोचना की है। ‘विज्ञान जाथा’ के चेयरमैन Jayant Pandya ने इसे “मूर्खतापूर्ण” बताते हुए कहा कि किसी भी अनैतिक माने जाने वाले व्यवसाय की तुलना समाज सेवा से करना उचित नहीं है। वहीं लेउवा पाटीदार समाज के नेता Parsottam Pipaliya ने बयान को अत्यंत निंदनीय बताया और अभिनेत्री से सार्वजनिक स्पष्टीकरण या माफी की मांग की है।

बताया जा रहा है कि मोना थीबा इन दिनों 27 फरवरी को रिलीज होने वाली गुजराती फिल्म ‘शक्ति’ के प्रमोशन में व्यस्त हैं। हालांकि फिल्म की कहानी और इस बयान के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। फिलहाल उनके इस बयान ने बहस को जन्म दे दिया है और विरोध का स्वर तेज होता जा रहा है।

न गोला-बारूद, न मिसाइल… कैंची से जंग लड़ रहे यूक्रेनी सैनिक, ऐसे काट रहे रूस के ‘छोटे’ ड्रोन


 Russia और Ukraine के बीच जारी युद्ध में अब एक अनोखी तस्वीर सामने आई है। खबर है कि यूक्रेनी सैनिक आधुनिक हथियारों के साथ-साथ एक साधारण कैंची भी साथ रख रहे हैं। वजह है रूस द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे फाइबर-ऑप्टिक कंट्रोल वाले छोटे ड्रोन, जिन्हें सैनिक ‘छुटकू सैनिक’ कहकर संबोधित कर रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये ड्रोन आसमान से हमला करने के बजाय ज़मीन के करीब रहकर फाइबर-ऑप्टिक केबल के जरिए ऑपरेट होते हैं। चूंकि इन पर पारंपरिक जैमिंग सिस्टम का असर नहीं होता, इसलिए इन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में यूक्रेनी सैनिक ड्रोन की कंट्रोल केबल तक पहुंचकर उसे कैंची से काट देते हैं, जिससे ड्रोन तुरंत निष्क्रिय हो जाता है।

युद्ध ने आधुनिक तकनीक और साधारण उपायों का अनोखा संगम दिखाया है। जहां एक ओर हाई-टेक हथियार और मिसाइल सिस्टम हैं, वहीं दूसरी ओर एक छोटी सी कैंची भी रणनीतिक हथियार बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दर्शाता है कि युद्ध में केवल अत्याधुनिक तकनीक ही नहीं, बल्कि त्वरित जुगाड़ और जमीनी समझ भी अहम भूमिका निभाती है।

रूस-यूक्रेन संघर्ष लगातार नए रूप ले रहा है और दोनों पक्ष लगातार नई रणनीतियां अपना रहे हैं। इस बीच यूक्रेनी सैनिकों की यह ‘कैंची रणनीति’ चर्चा का विषय बनी हुई है।

कभी भारत था आगे, आज चीन 6 गुना अमीर! कहां पिछड़ गई हमारी अर्थव्यवस्था?




 भारत और चीन की आर्थिक यात्रा की तुलना आज फिर चर्चा में है। एक समय ऐसा था जब 1980 के दशक में भारत की प्रति व्यक्ति आय चीन से अधिक मानी जाती थी। लेकिन बीते चार दशकों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। आज चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत से कई गुना आगे निकल गया है।

China ने 1980 के दशक में बड़े पैमाने पर आर्थिक सुधार, निर्यात-आधारित मैन्युफैक्चरिंग और विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया। विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) की स्थापना और तेज़ इंफ्रास्ट्रक्चर विकास ने उसे वैश्विक सप्लाई चेन का केंद्र बना दिया। वहीं India ने 1991 के बाद उदारीकरण की राह पकड़ी और आईटी व सेवा क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात क्षमता उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ सकी।

चीन की आर्थिक नीतियों में दीर्घकालिक योजना, बड़े पैमाने पर औद्योगिक उत्पादन और आक्रामक निर्यात रणनीति प्रमुख रही। इसके मुकाबले भारत को नीति क्रियान्वयन, इंफ्रास्ट्रक्चर, श्रम सुधार और विनिर्माण क्षेत्र में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

हालांकि भारत ने भी पिछले तीन दशकों में उल्लेखनीय प्रगति की है और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में अब भी चीन से काफी पीछे है। विशेषज्ञ मानते हैं कि मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, स्किल डेवलपमेंट और निर्यात विस्तार पर फोकस करके भारत इस अंतर को कम कर सकता है।