Monday, 26 January 2026

भारत ने घटाया रूसी तेल आयात, चीन ने मौके का फायदा उठाकर रिकॉर्ड खरीद से रूस की तिजोरी भर दी


  नई दिल्ली:

वैश्विक तेल बाजार में समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों को लेकर सतर्कता बरतते हुए भारत ने रूसी कच्चे तेल के आयात में आंशिक कटौती की, तो चीन ने इस मौके को हाथ से जाने नहीं दिया। चीन ने रूस से तेल खरीद को रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ाकर न सिर्फ अपनी ऊर्जा जरूरतें मजबूत कीं, बल्कि रूस के लिए भी बड़ी आर्थिक राहत का रास्ता खोल दिया।

मार्केट डेटा एजेंसी LSEG के अनुसार, जनवरी 2026 में चीन समुद्री मार्ग से रूस से प्रतिदिन लगभग 15 लाख बैरल कच्चा तेल आयात करने की तैयारी में है। यह आंकड़ा दिसंबर 2025 के करीब 11 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले काफी ज्यादा है। खास बात यह है कि रूसी यूराल क्रूड (Urals Crude), जो बीते महीनों तक भारतीय रिफाइनरियों की पहली पसंद था, अब तेजी से चीन का रुख कर रहा है।

आंकड़े बताते हैं कि जनवरी में चीन ने यूराल क्रूड की खरीद बढ़ाकर 4.05 लाख बैरल प्रतिदिन कर दी है, जो पिछले डेढ़ साल का सबसे ऊंचा स्तर है। रूस ने यह तेल चीन को भारी छूट पर उपलब्ध कराया, जिससे चीन को सस्ता ऊर्जा संसाधन मिला और रूस को प्रतिबंधों के बीच स्थिर आय।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत द्वारा आयात घटाने का फैसला भू-राजनीतिक दबाव और भुगतान जोखिमों से जुड़ा है, जबकि चीन ने पश्चिमी प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए आक्रामक खरीद रणनीति अपनाई है। इस घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि वैश्विक ऊर्जा राजनीति में अवसर मिलने पर चीन तेजी से कदम उठाता है, जबकि भारत अधिक संतुलित और सतर्क रुख अपना रहा है।

दुनिया की सबसे अजीब इमारतों में शुमार हैदराबाद की ‘मछली वाली बिल्डिंग’, बन चुकी है बड़ा टूरिस्ट अट्रैक्शन


 वास्तुकला की दुनिया में जहां ऊंची इमारतें और कांच से ढके टावर चर्चा में रहते हैं, वहीं हैदराबाद की एक अनोखी इमारत अपनी अलग पहचान बना चुकी है। राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) का मुख्यालय, जिसे आमतौर पर ‘मछली वाली बिल्डिंग’ कहा जाता है, अब दुनिया की सबसे अजीब और अनोखी इमारतों की सूची में शामिल हो गया है।

साल 2012 में तैयार हुई यह चार मंजिला इमारत पूरी तरह एक विशाल मछली के आकार में बनाई गई है। इसकी डिजाइन ‘मिमिक्री आर्किटेक्चर’ का शानदार उदाहरण है, जिसमें इमारत का स्वरूप उसके कार्य से मेल खाता है। चूंकि यह भवन मत्स्य पालन से जुड़े राष्ट्रीय संस्थान का मुख्यालय है, इसलिए इसे मछली का रूप दिया गया।

इस इमारत की बाहरी संरचना धातु की चमकदार परत से ढकी हुई है। इसके दोनों ओर बने पंख, आगे की ओर गोलाकार खिड़कियां और संपूर्ण आकृति इसे दूर से देखने पर एक विशाल मछली जैसा आभास देती है। खासतौर पर रात के समय, जब इस पर नीली रोशनी डाली जाती है, तो यह दृश्य और भी आकर्षक हो जाता है—मानो शहर के बीचों-बीच कोई बड़ी मछली पानी में तैर रही हो।

अपनी अनोखी बनावट के कारण यह इमारत अब सिर्फ एक सरकारी कार्यालय नहीं, बल्कि हैदराबाद का प्रमुख पर्यटन आकर्षण भी बन चुकी है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक और वास्तुकला के छात्र इस अनूठी रचना को देखने के लिए खास तौर पर यहां पहुंचते हैं। इस इमारत ने भारतीय वास्तुकला की रचनात्मकता को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दिलाई है। 


 

1 साल से कम उम्र के बच्चों को भूलकर भी न खिलाएं ये चीजें, डॉक्टर ने हेल्दी और अनहेल्दी फूड्स को दी रेटिंग


  नई दिल्ली: 1 साल से कम उम्र के बच्चों की डाइट को लेकर माता-पिता अक्सर परेशान रहते हैं। इस उम्र में बच्चों का पाचन तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं होता, इसलिए कुछ चीजें उनके लिए नुकसानदायक साबित हो सकती हैं।

डॉक्टरों के अनुसार, सबसे पहले शहद बिल्कुल न दें। इससे बोटुलिज्म जैसी गंभीर बीमारी का खतरा होता है। इसके अलावा चीनी, नमक, पैकेट वाले जूस, सॉफ्ट ड्रिंक, बिस्किट और नमकीन बच्चों के लिए हानिकारक हैं। गाय का दूध भी 1 साल से पहले न दें, क्योंकि यह बच्चे का पेट पूरी तरह पचा नहीं पाता और आयरन की कमी हो सकती है।

कुछ चीजें सीमित मात्रा में दी जा सकती हैं, जैसे अंडा (अच्छी तरह पका हुआ) और ड्राई फ्रूट्स पाउडर या पेस्ट में, लेकिन किसी भी नई चीज़ को देने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

सुरक्षित और हेल्दी विकल्पों में मां का दूधउबली और मैश की हुई सब्ज़ियां जैसे गाजर, कद्दू और लौकी, दलिया और चावल का मांड, और मैश किया हुआ केला या सेब शामिल हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि इस उम्र में बच्चे को सादा, ताजा और बिना मसाले वाला खाना ही देना चाहिए। सही डाइट से बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ती है, पाचन ठीक रहता है और भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से बचाव होता है।

दिल्ली-एनसीआर में हवा साफ, लेकिन ठंड बरकरार; तेज हवाओं के बीच मौसम विभाग ने जारी किया येलो अलर्ट


 नई दिल्ली:

दिल्ली-एनसीआर में बीते 24 घंटों के दौरान मौसम पूरी तरह साफ बना रहा। शनिवार को लगातार दूसरे दिन हवा की गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया, जिससे लोगों को प्रदूषण से राहत मिली।

हालांकि, करीब 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली ठंडी हवाओं के कारण सर्दी का असर बना रहा और लोगों को ठंड का एहसास होता रहा। सुबह और शाम के समय ठंड ज्यादा महसूस की गई।

मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव के संकेत हैं। विभाग ने मंगलवार के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, जिसे देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि तेज हवाओं और तापमान में हल्की गिरावट के कारण ठंड और बढ़ सकती है।

“एक देश के राष्ट्रपति को अपहरण कर लिया गया…”: गणतंत्र दिवस पर अखिलेश यादव का सरकार पर तीखा हमला, बेरोजगारी-स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल


  नई दिल्ली

गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज देश में हालात इतने चिंताजनक हो गए हैं कि “एक देश के राष्ट्रपति को अपहरण कर लिया जाता है और सरकार खामोश रहती है।”

अखिलेश यादव ने पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समाज के साथ लगातार हो रहे अन्याय का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार सिर्फ भाषणों और जश्न तक सीमित रह गई है, जबकि ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं है, गरीब मरीजों को समय पर दवा और इलाज नहीं मिल पा रहा।

उन्होंने बेरोजगारी के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा और कहा कि आज हालात ऐसे हैं कि युवा कितनी भी डिग्रियां हासिल कर लें, उन्हें नौकरी नहीं मिल रही। पढ़ा-लिखा युवा हताश और निराश है, लेकिन सरकार के पास इसका कोई ठोस समाधान नहीं है।

अखिलेश यादव ने कहा कि गणतंत्र दिवस सिर्फ परेड और औपचारिकता का दिन नहीं है, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों को याद करने का अवसर है। अगर जनता को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार नहीं मिलेगा, तो लोकतंत्र सिर्फ कागज़ों तक सिमट कर रह जाएगा।

उन्होंने सरकार से अपील की कि वह प्रचार से बाहर निकलकर जनता के असली मुद्दों पर काम करे और संविधान की मूल भावना का सम्मान करे।

सोना ₹1.65 लाख के पार, एक झटके में ₹3520 महंगा, चांदी में ₹5000 की उछाल—काशी से मेरठ तक नए रेट


  उत्तर प्रदेश के सर्राफा बाजार में सोना-चांदी की कीमतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी का सीधा असर घरेलू बाजार पर दिख रहा है। 26 जनवरी 2026 को यूपी में सोने ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। राजधानी लखनऊ में 24 कैरेट सोना ₹3520 प्रति 10 ग्राम उछलकर ₹1,65,030 तक पहुंच गया है, जबकि मेरठ में इसका भाव ₹1,65,040 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।

काशी यानी वाराणसी के सर्राफा बाजार में भी सोने की कीमत में जोरदार तेजी देखने को मिली। यहां 24 कैरेट सोना ₹3330 की बढ़त के साथ ₹1,62,100 प्रति 10 ग्राम हो गया। इससे पहले 25 जनवरी को इसका भाव ₹1,58,770 प्रति 10 ग्राम था। लगातार बढ़ती कीमतों ने निवेशकों के साथ-साथ आम खरीदारों की चिंता भी बढ़ा दी है।

चांदी की बात करें तो इसमें भी जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। यूपी में चांदी की कीमत ₹5000 प्रति किलो बढ़कर ₹3,40,000 प्रति किलो तक पहुंच गई है। एक दिन पहले यानी 25 जनवरी को चांदी का भाव ₹3,35,000 प्रति किलो था।

सर्राफा कारोबारियों के मुताबिक, वैश्विक बाजार में अनिश्चितता, डॉलर की चाल और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग के चलते सोना-चांदी लगातार मजबूत बने हुए हैं। आने वाले दिनों में कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

हे भगवान! कलियुग की हदें पार—जमीन की रजिस्ट्री तक 3 दिन फ्रिज में रखा किसान का शव, फिर हुआ अंतिम संस्कार


 


 बिहार के सीतामढ़ी जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाली एक दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां एक किसान की करंट लगने से मौत हो गई, लेकिन परिजनों ने तीन दिन तक उसका अंतिम संस्कार नहीं किया। वजह जानकर हर कोई हैरान रह गया—पहले मुआवजे में मिलने वाली जमीन की रजिस्ट्री कराई गई, फिर शव को अंतिम विदाई दी गई।

यह मामला सुरसंड थाना क्षेत्र के मलाही गांव का है। गांव निवासी नईम अंसारी (55) 20 जनवरी को अपने खेत में गेहूं की पटवन कर रहे थे। इसी दौरान पास के खेत में मवेशियों से फसल बचाने के लिए लगाए गए नंगे बिजली के तार की चपेट में आ गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

मौत के बाद गांव में पंचायत बुलाई गई। पंचायत ने फैसला सुनाया कि जिस खेत में करंट लगा तार था, उसके मालिक रत्नेश सिंह मृतक के परिवार को मुआवजे के तौर पर चार कट्ठा जमीन देंगे। दोनों पक्षों में सहमति बनी, लेकिन पंचायत ने एक हैरान कर देने वाली शर्त रख दी—जब तक जमीन की रजिस्ट्री पूरी नहीं होगी, शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा

इस फैसले के तहत सुरसंड से एक फ्रीजर मंगवाया गया और किसान का शव तीन दिनों तक फ्रिज में रखा गया। जैसे ही जमीन की रजिस्ट्री पूरी हुई, उसके बाद अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना ने न सिर्फ इलाके बल्कि पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अब इंसानियत से पहले कागजी कार्रवाई जरूरी हो गई है।

जया बच्चन की सख्त ‘राजनीति’ पर राजीव शुक्ला का खुलासा, रेखा से की तुलना—कहा, “रत्ती भर भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं”

नई दिल्ली। राजनीति और सिनेमा के रिश्ते पर अक्सर चर्चा होती रही है, लेकिन कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने इस विषय पर बेहद साफ और बेबाक राय रखी है। एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में उन्होंने संसद में फिल्मी सितारों की भूमिका पर खुलकर बात की और जया बच्चन की तुलना रेखा से करते हुए कई दिलचस्प बातें साझा कीं।

राजीव शुक्ला ने बताया कि जया बच्चन संसद में अपने अनुशासन, गंभीरता और मुखर स्वभाव के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कहा कि जया बच्चन को किसी भी तरह की लापरवाही बिल्कुल पसंद नहीं है और वे “रत्ती भर भी बेपरवाही बर्दाश्त नहीं करतीं।” जरूरत पड़ने पर वे मंत्रियों तक को टोकने से पीछे नहीं हटतीं। संसद में उनकी उपस्थिति फिल्मी सितारों में सबसे बेहतरीन मानी जाती है और वे हर सत्र में सक्रिय भागीदारी निभाती हैं।

इसके उलट, राजीव शुक्ला ने कहा कि रेखा को पूरी तरह सक्रिय राजनेता नहीं माना जा सकता। उन्होंने बताया कि रेखा संसद सत्रों में बहुत कम आती थीं और उन्होंने सांसद के रूप में मिलने वाली सुविधाएं—जैसे सरकारी बंगला या फंड—भी नहीं लीं। उनका झुकाव राजनीति से ज्यादा दूरी बनाए रखने का रहा।

इंटरव्यू के दौरान राजीव शुक्ला ने जया प्रदा की मेहनत और राजनीतिक सक्रियता की भी सराहना की। इसके अलावा उन्होंने सचिन तेंदुलकर और लता मंगेशकर जैसे राज्यसभा सांसदों का जिक्र करते हुए कहा कि हर सेलेब्रिटी की राजनीति में भूमिका अलग-अलग होती है। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर सिनेमा और राजनीति के रिश्ते पर चर्चा तेज हो गई है।

 

नशे में धुत युवकों का तांडव! पुणे के मगरपट्टा चौक पर दुकानों में तोड़फोड़, राहगीरों पर हमला, CCTV में कैद वारदात


 महाराष्ट्र के पुणे शहर में शनिवार रात एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए। मगरपट्टा चौक जैसे व्यस्त और आईटी हब इलाके में 7–8 युवकों की एक गैंग ने जमकर उत्पात मचाया। नशे की हालत में सड़कों पर उतरे इन युवकों ने न सिर्फ दुकानों में तोड़फोड़ की, बल्कि राहगीरों और टपरी चालकों पर भी हमला कर दहशत फैला दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, युवक शराब के नशे में गाली-गलौज करते हुए अचानक हिंसक हो गए। कुछ आरोपियों के हाथों में हथियार भी बताए जा रहे हैं। अचानक हुए इस हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और दुकानदार व ग्राहक अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। कई लोगों को जान से मारने की धमकी भी दी गई, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया।

इस पूरी घटना का वीडियो आसपास लगे CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हो गया है। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह युवकों का यह समूह मिलकर सार्वजनिक स्थान पर हंगामा कर रहा है और आम लोगों पर हमला कर रहा है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात पर काबू पाया। फिलहाल पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर जांच में जुटी है।

मगरपट्टा चौक पुणे का एक प्रमुख आईटी और रिहायशी इलाका माना जाता है। ऐसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में हुई इस हिंसक घटना ने न सिर्फ स्थानीय दुकानदारों बल्कि यहां काम करने वाले हजारों कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

जापान वाली सुशी अब देहरादून में! एनिमी फिल्मों का फेमस जायका यहां मिल रहा ऑथेंटिक टेस्ट के साथ, जानें लोकेशन


 देहरादून के फूड लवर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है। अब जापानी एनिमी फिल्मों और कार्टून में नजर आने वाली मशहूर डिश सुशी (Sushi) का असली स्वाद शहर में ही चखा जा सकता है। जापान जाने का सपना भले पूरा न हो, लेकिन देहरादून के डियाबलो रेस्टोरेंट में अब ऑरिजिनल जापानी स्टाइल सुशी परोसी जा रही है।

इस खास डिश को तैयार कर रहे हैं रेस्टोरेंट के शेफ भरत नेगी, जिन्होंने ओमान के एक फाइव स्टार होटल में काम करने के बाद दिल्ली में अनुभव हासिल किया और अब देहरादून में इंटरनेशनल फ्लेवर लेकर आए हैं। शेफ भरत के मुताबिक, सुशी बनाने के लिए खास किस्म के स्टार्चयुक्त चावल का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे खासतौर पर जापान से मंगवाया जाता है।

सुशी की सबसे अहम पहचान है इसकी नोरी शीट—काले रंग की क्रिस्पी सीवीड शीट, जो स्वाद के साथ-साथ इसकी बनावट को भी खास बनाती है। सही तापमान, चावल की परफेक्ट बनावट और ताजे इंग्रेडिएंट्स के साथ तैयार की गई यह सुशी न सिर्फ स्वादिष्ट है, बल्कि पौष्टिक भी मानी जाती है।

देहरादून के लोगों के लिए यह किसी ट्रीट से कम नहीं है। अब जापानी कल्चर और फ्लेवर का अनुभव लेने के लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं, क्योंकि एनिमी फिल्मों वाली सुशी अब आपके अपने शहर में, वो भी ऑथेंटिक टेस्ट के साथ उपलब्ध 

भारी बर्फबारी में भी नहीं छोड़ा साथ! 4 दिन भूखा-प्यासा मालिक के शव के पास डटा रहा वफादार पिटबुल, रुला देगी ये कहानी


 


 हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले से इंसान और जानवर की वफादारी की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो हर किसी की आंखें नम कर देगी। भरमौर क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध भरमाणी मंदिर के पास जंगल में लापता हुए दो युवकों के शव बरामद किए गए हैं। इस दर्दनाक हादसे में सबसे भावुक कर देने वाली बात यह रही कि एक युवक का पालतू पिटबुल डॉगी चार दिनों तक भीषण बर्फबारी, भूख और प्यास के बावजूद अपने मालिक के शव के पास डटा रहा और उसे अकेला नहीं छोड़ा।

जानकारी के मुताबिक, विकसित राणा और पीयूष मंदिर में दर्शन करने के बाद आसपास के ऊंचाई वाले इलाके में वीडियो बनाने के लिए गए थे। इसी दौरान अचानक भारी बर्फबारी हो गई और दोनों युवक जंगल में फंस गए। 23 जनवरी को इलाके में पांच फीट से अधिक बर्फ गिरने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन भी मुश्किल हो गया।

चार दिन बाद जब रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची तो वहां का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। एक युवक के शव के पास उसका पालतू पिटबुल कुत्ता बैठा हुआ था, जो न तो वहां से हटा और न ही किसी को शव के करीब आने से रोकने की कोशिश छोड़ी। ठंड, भूख और डर के बावजूद डॉगी ने अपने मालिक की आखिरी पहरेदारी निभाई।

स्थानीय लोगों और रेस्क्यू टीम के सदस्यों के अनुसार, यह दृश्य देखकर सभी की आंखें भर आईं। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि कुत्तों की वफादारी सिर्फ कहानियों या फिल्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि असल जिंदगी में भी वे इंसानों से कहीं ज्यादा निष्ठावान होते हैं। हिमाचल की बर्फीली वादियों से आई यह कहानी आज पूरे देश को भावुक कर रही है।

77वें गणतंत्र दिवस पर भारत की भव्यता की साक्षी बनीं वॉन डेर लेयेन, यूरोपीय परिषद अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भी रहे मौजूद


 यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन नौ दिवसीय भारत यात्रा पर हैं और आज उन्होंने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस ऐतिहासिक अवसर पर उनके साथ यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भी उपस्थित रहे। नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित इस भव्य समारोह में भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और लोकतांत्रिक परंपराओं का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया।

गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होकर वॉन डेर लेयेन ने भारत की समृद्ध विरासत, अनुशासित सशस्त्र बलों और जीवंत सांस्कृतिक झांकियों की सराहना की। उन्होंने इसे अपने लिए सम्मान और प्रेरणादायक अनुभव बताया। इस अवसर ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी, लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक सहयोग को और मजबूत करने का संदेश दिया।

विशेषज्ञों के अनुसार, वॉन डेर लेयेन की यह यात्रा भारत–यूरोपीय संघ संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। रक्षा, व्यापार, जलवायु परिवर्तन, तकनीक और वैश्विक शांति जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। गणतंत्र दिवस समारोह में उनकी मौजूदगी भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी साख को भी दर्शाती है।

Saturday, 24 January 2026

26 जनवरी का वो सच, जिसे जानकर आप चौंक जाएंगे: 17 साल तक गणतंत्र दिवस नहीं, इसे स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया गया

(उत्तर प्रदेश):

हर साल 26 जनवरी को पूरे देश में गणतंत्र दिवस बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। पर क्या आप जानते हैं कि आजादी से पहले यही तारीख 17 साल तक “स्वतंत्रता दिवस” के रूप में मनाई जाती थी? तब क्रांतिकारी इस दिन रैली निकालते और इसे आजादी की प्रतीक के तौर पर मानते थे।

कानपुर के इतिहासकार अनूप शुक्ल बताते हैं कि 1929 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में “पूर्ण स्वराज” का प्रस्ताव पास किया गया। इसका साफ मतलब था कि देश अब अंग्रेजों से केवल आधी-अधूरी नहीं, बल्कि पूरी आजादी चाहता है। इस निर्णय के बाद तय हुआ कि 26 जनवरी 1930 को पूरे देश में स्वतंत्रता की औपचारिक घोषणा की जाएगी। यही वजह है कि 26 जनवरी भारतीय इतिहास में एक ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक तारीख बन गई।

इस प्रकार, 1930 से लेकर 1946 तक यह दिन देशभर में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। लोग इसे आजादी की उम्मीद और देशभक्ति की भावना के प्रतीक के रूप में देखते थे।

स्वतंत्रता मिलने के बाद, 26 जनवरी को 1950 से गणतंत्र दिवस के रूप में मनाना शुरू किया गया। अब यह दिन केवल आजादी की याद नहीं, बल्कि भारतीय संविधान लागू होने और लोकतंत्र के प्रतीक के रूप में भी मनाया जाता है।

इतिहास बताता है कि 26 जनवरी का महत्व सिर्फ एक छुट्टी या परेड का दिन नहीं, बल्कि देशभक्ति और आजादी की भावना का जीवंत प्रतीक है।