Thursday, 15 January 2026

10-Min Delivery पर ब्रेक! सरकार की सख्ती के बाद बदले Blinkit, Swiggy और Zepto के तेवर

 


क्विक कॉमर्स की दुनिया में “10 मिनट डिलीवरी” का दौर अब धीमा पड़ता दिख रहा है। अगर आप Blinkit, Zepto या Swiggy Instamart जैसे ऐप्स पर मिनटों में ग्रॉसरी मंगवाते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है।

गोल्डमैन सैक्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत के टॉप 150 शहरों में क्विक कॉमर्स का बाजार करीब 235 अरब डॉलर का है और यह सेक्टर 2025 से 2030 के बीच 35–40 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ सकता है। बावजूद इसके, सरकार की सख्ती और डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों ने इस इंडस्ट्री को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है।

Blinkit के बाद अब Zepto, Swiggy Instamart और Flipkart Minutes ने भी अपने ब्रांडिंग से “10 मिनट डिलीवरी” के दावे को लगभग हटा लिया है। इससे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—क्या भारत में 10 मिनट डिलीवरी का दौर खत्म होने वाला है?

सरकार की सख्ती ने बदला खेल

पिछले हफ्ते केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने क्विक कॉमर्स कंपनियों के साथ एक अहम बैठक की। इसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा कि कंपनियां डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। खासतौर पर “10 मिनट डिलीवरी” जैसे वादों पर चिंता जताई गई, क्योंकि इससे राइडर्स पर अत्यधिक समय का दबाव पड़ता है, जिससे सड़क हादसों का खतरा बढ़ता है।

इस चेतावनी के बाद कंपनियों ने रातों-रात अपनी ब्रांडिंग और मार्केटिंग स्ट्रेटेजी में बदलाव शुरू कर दिया।

Blinkit, Zepto और Swiggy के नए टैगलाइन

• Blinkit — पहले ऐप पर लिखा था “10,000+ प्रोडक्ट्स 10 मिनट में डिलीवर”, अब इसे बदलकर “30,000+ प्रोडक्ट्स आपके दरवाजे तक” कर दिया गया है।

• Zepto — अब “10 मिनट” की जगह “Groceries in minutes” यानी “मिनटों में ग्रॉसरी” का दावा कर रहा है।

• Swiggy Instamart — 10 मिनट का जिक्र हटाकर अब “Groceries and More” यानी “ग्रॉसरी और बहुत कुछ” को अपना नया चेहरा बनाया है।

• हालांकि, Tata Group की BigBasket अभी भी खुद को “10 min grocery app” बताने पर कायम है।

10 मिनट डिलीवरी पर क्यों उठे सवाल?

नए साल की पूर्व संध्या पर देशभर में गिग वर्कर्स ने बड़े स्तर पर हड़ताल की थी। डिलीवरी पार्टनर्स ने अपनी सुरक्षा, कम कमाई और सड़क जोखिम को लेकर विरोध जताया।

उनका कहना था कि 10 मिनट की डिलीवरी के दबाव में उन्हें तेज रफ्तार से वाहन चलाना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। कई हादसों और मौतों के मामलों ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया।

आगे क्या होगा?

सरकार अब क्विक कॉमर्स सेक्टर के लिए नए नियम और सुरक्षा दिशानिर्देश लाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में कंपनियां डिलीवरी समय के बजाय सुरक्षा, विश्वसनीयता और सर्विस क्वालिटी पर ज्यादा फोकस कर सकती हैं।

फिलहाल, “10 मिनट डिलीवरी” का दौर भले पूरी तरह खत्म न हो, लेकिन यह निश्चित रूप से पहले जैसा आक्रामक नहीं रहेगा।

Wednesday, 14 January 2026

“पेरेंटिंग: कम मार्क्स आए तो क्या कमजोर है बच्चे का IQ? जानें कब ज़रूरी है IQ टेस्ट”

 
“क्या आपके बच्चे के स्कूल मार्क्स कम आ रहे हैं? चिंता होना स्वाभाविक है, लेकिन याद रखें – 12 साल की उम्र में एवरेज मार्क्स कोई असामान्य बात नहीं है। मैथ और साइंस जैसे विषयों में चुनौती आना आम है। सही मार्गदर्शन, धैर्य और सपोर्ट मिलने पर बच्चे बेहतरीन प्रदर्शन कर सकते हैं।

कम मार्क्स के कई कारण हो सकते हैं – पढ़ाई में मन न लगना, स्कूल या टीचर का प्रेशर, एग्जाम एंग्जाइटी, सही गाइडेंस का अभाव, नींद की कमी या हेल्थ फैक्टर। इसलिए सिर्फ मार्क्स देखकर बच्चे पर दबाव डालना सही नहीं है।

हर बच्चे की अपनी रुचियां और क्षमताएं होती हैं। कोई खेल, म्यूजिक, आर्ट या क्रिएटिव फील्ड में बेहतर होता है। पेरेंटिंग का मतलब है बच्चे को समझना, उसकी ताकत और रुचियों को पहचानना, और भावनात्मक रूप से सपोर्ट करना।

अब बात IQ टेस्ट की। IQ यानी इंटेलिजेंस कोशेंट टेस्ट बच्चों की सोचने-समझने, तर्क करने और समस्या सुलझाने की क्षमता को मापता है। यह मुख्य रूप से लॉजिकल थिंकिंग, मैथ, मेमोरी और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल को परखता है।

लेकिन ध्यान रखें, IQ टेस्ट बच्चे की पूरी इंटेलिजेंस का पैमाना नहीं है। यह क्रिएटिविटी, सोशल स्किल्स या टैलेंट को नहीं मापता। बच्चे का मूड, वातावरण और एक्सपोजर भी इसका असर डालते हैं।

इसलिए बच्चे को बिना दबाव दिए समझें, उसकी रुचियों और क्षमताओं को पहचानें। सही गाइडेंस और सपोर्ट से हर बच्चा अपनी गति से सीख सकता है और तरक्की कर सकता है।

याद रखें, प्यार और समझदारी से की गई पेरेंटिंग ही बच्चे की असली ताकत बनती है।

मकर संक्रांति 2026: तिल, गुड़ और मूंगफली – सर्दियों के सुपरफूड, सेहत और ऊर्जा का खजाना”

 

मकर संक्रांति का त्योहार यानी ठंड की विदाई और नए सूरज का स्वागत। इस दिन भारत के हर हिस्से में अलग-अलग नामों से यह पर्व मनाया जाता है – कहीं पोंगल, कहीं खिचड़ी, तो कहीं लोहड़ी और उत्तरायण। लेकिन पूरे देश में एक चीज़ एक जैसी है – तिल, गुड़ और मूंगफली खाना।

यह तीनों सुपरफूड्स न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद हैं।

गुड़ में आयरन, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे मिनरल्स के साथ विटामिन A, C और E पाए जाते हैं। गुड़ खाने से डाइजेस्टिव हेल्थ सुधरती है, लिवर और ब्लड डिटॉक्स होता है, एनर्जी मिलती है, और एनीमिया का जोखिम कम होता है।

तिल में कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन और पोटैशियम जैसे मिनरल्स होते हैं। इसके सेवन से हड्डियां मजबूत होती हैं, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहते हैं, और आर्थराइटिस के दर्द में राहत मिलती है।

मूंगफली प्रोटीन और हेल्दी फैट का बेहतरीन स्रोत है। इसे खाने से वेट लॉस में मदद मिलती है, डायबिटीज और हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है, और ब्रेन फंक्शनिंग और आंखों की सेहत भी बेहतर होती है।

इसलिए इस मकर संक्रांति पर तिल, गुड़ और मूंगफली खाएं, सेहत और स्वाद दोनों का आनंद लें। यह हैं सर्दियों के असली सुपरफूड्स, जो आपकी ऊर्जा और सेहत को बनाए रखें।

आपको और आपके परिवार को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं!”

बेरोजगार बेटे खद अंजामने गुस्से में मां की हत्या, दो साल से चल रहे घरेलू तनाव का


 सूरत के चौक बाजार इलाके में मंगलवार दोपहर एक दुखद वारदात सामने आई। 32 वर्षीय अविनाश ने अपनी 57 वर्षीय मां चंद्रकला को गुस्से में चाकू से मार दिया। अविनाश पिछले दो साल से बेरोजगार था और मां अक्सर उसे काम खोजने और घर में मदद करने के लिए कहती थी।

बीते सोमवार को भी चंद्रकला ने उसे डांटा था, जिसके बाद अविनाश ने धमकी दी थी कि अगर दोबारा डांटा तो वह उसे नुकसान पहुँचाएगा। मंगलवार दोपहर अविनाश का भाई राजेश काम पर गया हुआ था, इसी दौरान मां ने अविनाश से फिर से काम खोजने के लिए कहा। बात बढ़ गई और बहस के दौरान अविनाश ने अचानक चाकू से हमला कर दिया।

पड़ोसियों ने शोर सुनकर एम्बुलेंस बुलाकर मां को अस्पताल पहुँचाया, लेकिन अधिक रक्त बह जाने के कारण उनकी मौत हो चुकी थी। घटना के बाद अविनाश फरार हो गया था, लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। मामला अब चौक बाजार पुलिस थाने में दर्ज है।

पिंक बॉल टेस्ट के भविष्य पर संकट, इंग्लैंड कर सकता है डे/नाइट टेस्ट का बहिष्कार


 नाइट पिंक बॉल टेस्ट का भविष्य खतरे में नजर आ रहा है। इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) भविष्य में ऑस्ट्रेलिया में होने वाली एशेज सीरीज़ के तहत किसी भी पिंक-बॉल टेस्ट को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फैसला एशेज सीरीज़ की समीक्षा के दौरान ECB और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के अधिकारियों के बीच हुई चर्चाओं के बाद लिया गया है।

इंग्लैंड का यह रुख हाल ही में खेले गए एशेज के दूसरे टेस्ट से जुड़ा माना जा रहा है, जहां बेन स्टोक्स की टीम को 8 विकेट से करारी हार झेलनी पड़ी थी। यह मुकाबला एकतरफा साबित हुआ, जिसके बाद पिंक बॉल की निष्पक्षता और संतुलन को लेकर सवाल उठने लगे।

आंकड़े भी इंग्लैंड के खिलाफ जाते नजर आते हैं। अब तक ऑस्ट्रेलिया ने खेले गए 15 पिंक-बॉल टेस्ट में से 14 में जीत दर्ज की है। उनकी एकमात्र हार 2022 में गाबा में वेस्टइंडीज के खिलाफ हुई थी, जहां शमार जोसेफ के शानदार प्रदर्शन ने इतिहास रच दिया था।

अगर इंग्लैंड पिंक-बॉल टेस्ट खेलने से इनकार करता है, तो डे/नाइट टेस्ट फॉर्मेट के भविष्य और अस्तित्व पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।


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राष्ट्रपति भवन की सैर अब आम लोगों के लिए आसान: जानिए टिकट, टाइमिंग और अंदर की खास बातें


  दिल्ली की यात्रा पर आने वाले पर्यटकों के लिए अब राष्ट्रपति भवन घूमना सपना नहीं रहा। भारत के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास और देश की सबसे भव्य इमारतों में से एक, राष्ट्रपति भवन अपनी शान, इतिहास और वास्तुकला के लिए जाना जाता है। आमतौर पर लोग लाल किला, इंडिया गेट या कुतुब मीनार की ही योजना बनाते हैं, लेकिन राष्ट्रपति भवन भी अनुभव और शिक्षा के लिहाज से बेहद खास है।

राष्ट्रपति भवन की यात्रा के दौरान आप देख सकते हैं खुले हॉल, सुंदर गलियारे, इतिहास से जुड़ी कहानियां और वह जगहें जहां बड़े फैसले लिए जाते हैं और विदेशी मेहमानों का स्वागत होता है। यह अनुभव न केवल दिलचस्प बल्कि यादगार भी होता है।

  • राष्ट्रपति भवन की सैर दिल्ली आने वाले हर यात्री के लिए एक अनोखा और शाही अनुभव साबित हो सकती है।


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श्रीराम ने मकर संक्रांति पर उड़ाई पतंग, इंद्रलोक में मोहित हुई एक स्त्री – जानिए पूरी कथा


 मकर संक्रांति के अवसर पर पतंग उड़ाने की परंपरा का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीराम ने बाल रूप में अपने भाइयों के साथ महल की छत से पहली बार पतंग उड़ाई थी। तुलसीदास के रामचरितमानस (बालकांड) में वर्णित है कि यह पतंग इंद्रलोक तक पहुंच गई, जहां एक स्त्री इस सुंदर पतंग को देखकर मोहित हो गई। उसे लगा कि इतनी सुंदर पतंग को उड़ाने वाला कितना आकर्षक होगा।

तमिल की तन्दनानरामायण के अनुसार, यह पतंग इंद्रलोक से वापस लौटी और इसी से पतंग उड़ाने की परंपरा शुरू हुई। आज भी मकर संक्रांति पर पतंगबाजी का आयोजन यही परंपरा निभाने और देवताओं को धन्यवाद अर्पित करने के उद्देश्य से किया जाता है।

पतंग उड़ाना न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। सर्दियों में सूरज की किरणों का स्वागत करने और विटामिन डी प्राप्त करने के लिए सुबह की पतंगबाजी शरीर को ऊर्जा देती है और त्वचा संबंधी रोगों से बचाती है।


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US-ईरान तनाव पर पहली बार मुस्लिम देश की खुली चेतावनी, कतर बोला—“हम जानते हैं क्या होने वाला है”


 अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर पहली बार किसी मुस्लिम देश की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। कतर ने दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव की आशंका को लेकर दुनिया को गंभीर चेतावनी दी है। कतर का कहना है कि यदि हालात और बिगड़े तो इसके विनाशकारी परिणाम पूरे क्षेत्र को भुगतने पड़ सकते हैं।

ईरान में जारी प्रदर्शनों और हजारों लोगों की मौत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आंदोलनकारियों को समर्थन देने का ऐलान किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि “आंदोलन जारी रखो, मदद रास्ते में है”, साथ ही ईरानी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित बैठक भी रद्द कर दी। इसके बाद अमेरिका के संभावित सैन्य कदम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने दोहा में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ने से न सिर्फ क्षेत्र बल्कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कतर अब भी कूटनीतिक समाधान की उम्मीद करता है और सभी पक्षों से बातचीत के जरिए संकट को टालने की कोशिश कर रहा है।

कतर ने जोर देकर कहा कि युद्ध किसी के हित में नहीं है और संवाद ही इस संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता है।


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Tuesday, 13 January 2026

पवार फैमिली की ‘ग्रैंड री-एंट्री’? शरद-अजित की सुलह पर NDA बना सबसे बड़ा रोड़ा”


 महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े उलटफेर की दहलीज पर खड़ी नजर आ रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दो धड़े — शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार — के बीच दूरी कम होने के संकेत मिलने लगे हैं। हाल ही में पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के स्थानीय निकाय चुनावों में दोनों गुटों का साथ आना इस बात का इशारा माना जा रहा है कि पार्टी के दो फाड़ अब फिर से जुड़ सकते हैं।

लेकिन यह सुलह इतनी आसान नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, अगर दोनों गुटों का विलय होता भी है, तो वह बिना शर्तों के नहीं होगा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अजित पवार की अगुवाई वाला गुट एनडीए में बना रहेगा या शरद पवार के साथ आकर महाविकास आघाड़ी की ओर लौटेगा। यही मुद्दा इस पूरी सुलह की कुंजी बना हुआ है।

डिप्टी सीएम अजित पवार ने हाल ही में पुणे में दिए एक इंटरव्यू में इस विषय पर बेहद संतुलित बयान दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान चुनावी प्रचार और मतदान पर है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि पार्टी के भविष्य से जुड़ा कोई भी बड़ा फैसला वरिष्ठ नेताओं की सहमति के बिना नहीं लिया जाएगा।

अजित पवार ने कहा,
“पार्टियां कार्यकर्ताओं से चलती हैं, लेकिन दिशा वरिष्ठ नेता तय करते हैं। कोई भी बड़ा निर्णय शीर्ष नेतृत्व से चर्चा के बाद ही होगा।”

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि यदि दोनों गुट एक होते हैं, तो एनडीए में बने रहना या उसे छोड़ना — इस पर फैसला भी उसी वक्त किया जाएगा। यही वजह है कि यह संभावित ‘पवार पैच-अप’ महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल ला सकता है।

अगर शरद पवार और अजित पवार एक मंच पर लौटते हैं, तो यह न सिर्फ एनसीपी बल्कि पूरे राज्य की राजनीतिक गणित को बदल कर रख देगा।

दिल्ली में न्याय की हत्या: इंसाफ की लड़ाई लड़ रही मां को गोलियों से भून दिया, मासूम बेटी बोली– ‘पुलिस अंकल अब मुझे भी मार डालेंगे’”

दिल्ली एक लड़की की मां-बाप दोनों को अपराधियों ने हत्या कर दी.

दिल्ली के शालीमार बाग में 10 जनवरी की शाम सिर्फ एक महिला की हत्या नहीं हुई, बल्कि न्याय, भरोसे और मानवता की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। अपने पति के कातिलों को सजा दिलाने के लिए वर्षों से अदालतों के चक्कर काट रही 44 वर्षीय रचना यादव को दिनदहाड़े गोली मार दी गई।

अब पीछे रह गई है उसकी नाबालिग बेटी, जिसकी कांपती आवाज़ ने पूरे देश को झकझोर दिया है —
“पुलिस अंकल… अब मुझे भी मार डालेंगे।”

यह कोई साधारण क्राइम नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का आईना है।

2023 में रचना यादव के पति की हत्या कर दी गई थी। उस दिन से रचना ने हार नहीं मानी। धमकियों, डराने और लगातार खतरे के बावजूद वह अदालतों में लड़ती रही। वह जानती थी कि उसका रास्ता खतरनाक है, लेकिन इंसाफ के लिए वह हर जोखिम उठाने को तैयार थी।

हाल ही में वह सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची थी ताकि आरोपी की अग्रिम जमानत रद्द करवाई जा सके। इससे साफ था कि उसने अपराधियों की नींद उड़ा दी थी। लेकिन कानून से डरने के बजाय, अपराधियों ने उसे ही हमेशा के लिए चुप करा दिया।

शाम के वक्त जब रचना अपने रोजमर्रा के काम से लौट रही थी, तभी घात लगाए बैठे हमलावरों ने उसे गोलियों से छलनी कर दिया। सड़क पर गिरती रचना के साथ उसकी बेटी की दुनिया भी टूट गई।

आज पुलिस की फाइलों में यह “एक और हत्या” होगी, लेकिन उस बच्ची के लिए यह उसकी पूरी जिंदगी का अंत है — पहले पिता और अब मां, दोनों को अपराधियों ने छीन लिया।

यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि एक सवाल है —
अगर गवाह और इंसाफ की लड़ाई लड़ने वालों को सिस्टम बचा नहीं सकता, तो न्याय बचेगा कैसे?


“ईरान में सत्ता परिवर्तन से कांपा पाकिस्तान, क्या मुनीर को चारों तरफ से घिरने का डर सता रहा है?”

 

ईरान में खामेनेई सरकार के खिलाफ तेज़ होते जनआंदोलनों ने सिर्फ तेहरान को ही नहीं, बल्कि इस्लामाबाद को भी बेचैन कर दिया है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को आशंका है कि अगर ईरान में अमेरिका समर्थित सरकार सत्ता में आई, तो पूरे क्षेत्र की सामरिक तस्वीर बदल जाएगी — और इसका सबसे बड़ा खामियाजा पाकिस्तान को भुगतना पड़ सकता है।

अब तक पाकिस्तान को अपनी पश्चिमी सीमा पर ईरान से एक तरह की रणनीतिक शांति मिली हुई थी। लेकिन यदि तेहरान की सत्ता वाशिंगटन के करीबी हाथों में जाती है, तो पाकिस्तान की यह ‘सेफ ज़ोन’ खत्म हो जाएगी। रावलपिंडी को डर है कि इसके बाद इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद को ईरान की ज़मीन से पाकिस्तान के बलूचिस्तान इलाके तक सीधी पहुंच मिल सकती है।

पाकिस्तान पहले ही भारत और अफगानिस्तान की तरफ से दबाव झेल रहा है। ऐसे में ईरान की दिशा से भी खतरा पैदा होना एक तीसरा मोर्चा खोल देगा। सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह स्थिति पाकिस्तान की सैन्य और आर्थिक क्षमता दोनों पर भारी दबाव डालेगी।

सबसे बड़ी चिंता पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। इजरायल के लिए पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र मुस्लिम परमाणु देश है, और रणनीतिक रूप से वह हमेशा उसके रडार पर रहा है। यदि ईरान कमजोर होता है या अमेरिका समर्थित शासन वहां स्थापित हो जाता है, तो इजरायल-मोसाद को पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन चलाने का नया प्लेटफॉर्म मिल सकता है।

यही वजह है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन की आहट को इस्लामाबाद में एक सामान्य राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा संकट की तरह देखा जा रहा है।

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हरिद्वार में घूम रहे थे हबीबुल्लाह और हबीबी, संतों ने कपड़ा देख पकड़ लिया, बोले- हम तो दोनों...


 हरिद्वार में हर की पैड़ी घाट पर पकड़े गए दो लड़के. (सांकेतिक तस्वीर-AI)

उत्तराखंड के हरिद्वार में हर की पैड़ी घाट पर उस वक्त हंगामा मच गया, जब दो युवक शेख जैसी वेशभूषा में घूमते नजर आए। धार्मिक स्थल पर उनकी संदिग्ध मौजूदगी देख स्थानीय तीर्थ पुरोहितों ने उन्हें रोक लिया और पूछताछ शुरू की। युवकों ने अपना नाम हबीबुल्लाह और हबीबी बताया, जिससे शक और गहरा हो गया।

सख्ती से पूछताछ करने पर दोनों ने कबूल किया कि वे यूट्यूब के लिए वीडियो बनाने आए थे और उसी उद्देश्य से यह वेश धारण किया था। मामले की जानकारी मिलने पर गंगा सभा ने तुरंत पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

गौरतलब है कि मकर संक्रांति के अवसर पर हरिद्वार में भारी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है, जिसे देखते हुए प्रशासन और पुलिस पहले से ही हाई अलर्ट पर हैं। ऐसे में इस तरह की गतिविधियों को सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर माना जा रहा है।

“मधेपुरा के युवाओं को नौकरी का सुनहरा मौका! हर प्रखंड में जॉब कैंप, 350 पदों पर होगी सीधी भर्ती”


 

मधेपुरा जिले के बेरोजगार युवाओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। जमशेदपुर (झारखंड) की प्रतिष्ठित सुरक्षा कंपनी सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस इंडिया लिमिटेड जिले में 350 पदों पर भर्ती करने जा रही है। इसके लिए मधेपुरा के सभी प्रखंडों में जॉब कैंप लगाए जाएंगे, जहां युवाओं को सीधे नौकरी पाने का अवसर मिलेगा।

भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत 16 जनवरी से श्रम भवन, जिला नियोजनालय मधेपुरा से होगी और इसके बाद अलग-अलग प्रखंडों में फरवरी तक जॉब कैंप आयोजित किए जाएंगे। इन कैंपों के माध्यम से सुरक्षा जवान, एसएलभी जवान, सुरक्षा सुपरवाइजर और सुरक्षा अधिकारी जैसे पदों पर चयन किया जाएगा।

सुरक्षा जवान के 220 पद, एसएलभी जवान के 60 पद समेत अन्य पदों पर भर्ती होगी। चयनित अभ्यर्थियों को ₹15,500 से ₹28,500 तक वेतन, साथ में ईपीएफ की सुविधा भी मिलेगी। योग्यता मैट्रिक से लेकर स्नातक तक रखी गई है और आयु सीमा 19 से 40 वर्ष निर्धारित की गई है। यह भर्ती मधेपुरा सहित पूरे बिहार के युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा अवसर मानी जा रही है।