महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े उलटफेर की दहलीज पर खड़ी नजर आ रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दो धड़े — शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार — के बीच दूरी कम होने के संकेत मिलने लगे हैं। हाल ही में पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के स्थानीय निकाय चुनावों में दोनों गुटों का साथ आना इस बात का इशारा माना जा रहा है कि पार्टी के दो फाड़ अब फिर से जुड़ सकते हैं।
लेकिन यह सुलह इतनी आसान नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, अगर दोनों गुटों का विलय होता भी है, तो वह बिना शर्तों के नहीं होगा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अजित पवार की अगुवाई वाला गुट एनडीए में बना रहेगा या शरद पवार के साथ आकर महाविकास आघाड़ी की ओर लौटेगा। यही मुद्दा इस पूरी सुलह की कुंजी बना हुआ है।
डिप्टी सीएम अजित पवार ने हाल ही में पुणे में दिए एक इंटरव्यू में इस विषय पर बेहद संतुलित बयान दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान चुनावी प्रचार और मतदान पर है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि पार्टी के भविष्य से जुड़ा कोई भी बड़ा फैसला वरिष्ठ नेताओं की सहमति के बिना नहीं लिया जाएगा।
अजित पवार ने कहा,
“पार्टियां कार्यकर्ताओं से चलती हैं, लेकिन दिशा वरिष्ठ नेता तय करते हैं। कोई भी बड़ा निर्णय शीर्ष नेतृत्व से चर्चा के बाद ही होगा।”
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि यदि दोनों गुट एक होते हैं, तो एनडीए में बने रहना या उसे छोड़ना — इस पर फैसला भी उसी वक्त किया जाएगा। यही वजह है कि यह संभावित ‘पवार पैच-अप’ महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल ला सकता है।
अगर शरद पवार और अजित पवार एक मंच पर लौटते हैं, तो यह न सिर्फ एनसीपी बल्कि पूरे राज्य की राजनीतिक गणित को बदल कर रख देगा।
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