ईरान में खामेनेई सरकार के खिलाफ तेज़ होते जनआंदोलनों ने सिर्फ तेहरान को ही नहीं, बल्कि इस्लामाबाद को भी बेचैन कर दिया है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को आशंका है कि अगर ईरान में अमेरिका समर्थित सरकार सत्ता में आई, तो पूरे क्षेत्र की सामरिक तस्वीर बदल जाएगी — और इसका सबसे बड़ा खामियाजा पाकिस्तान को भुगतना पड़ सकता है।
अब तक पाकिस्तान को अपनी पश्चिमी सीमा पर ईरान से एक तरह की रणनीतिक शांति मिली हुई थी। लेकिन यदि तेहरान की सत्ता वाशिंगटन के करीबी हाथों में जाती है, तो पाकिस्तान की यह ‘सेफ ज़ोन’ खत्म हो जाएगी। रावलपिंडी को डर है कि इसके बाद इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद को ईरान की ज़मीन से पाकिस्तान के बलूचिस्तान इलाके तक सीधी पहुंच मिल सकती है।
पाकिस्तान पहले ही भारत और अफगानिस्तान की तरफ से दबाव झेल रहा है। ऐसे में ईरान की दिशा से भी खतरा पैदा होना एक तीसरा मोर्चा खोल देगा। सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह स्थिति पाकिस्तान की सैन्य और आर्थिक क्षमता दोनों पर भारी दबाव डालेगी।
सबसे बड़ी चिंता पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। इजरायल के लिए पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र मुस्लिम परमाणु देश है, और रणनीतिक रूप से वह हमेशा उसके रडार पर रहा है। यदि ईरान कमजोर होता है या अमेरिका समर्थित शासन वहां स्थापित हो जाता है, तो इजरायल-मोसाद को पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन चलाने का नया प्लेटफॉर्म मिल सकता है।
यही वजह है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन की आहट को इस्लामाबाद में एक सामान्य राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा संकट की तरह देखा जा रहा है।
.jpg)
No comments:
Post a Comment