Thursday, 22 January 2026

मुहूर्त न निकलने पर भी करें काम की शुरुआत, मां सरस्वती से मिलेगी सफलता

बसंत पंचमी हिंदू धर्म में ज्ञान और कला की देवी सरस्वती का जन्मदिन माना जाता है। यह पर्व बसंती ऋतु के आगमन, प्रकृति के नवजागरण और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक भी है। इस दिन से होली की तैयारियां भी शुरू होती हैं और यह प्रेम और सौंदर्य के देवता कामदेव और रति से जुड़ा माना जाता है।

परंपरा के अनुसार, बसंत पंचमी पर लोग पीले या सफेद वस्त्र पहनकर मां सरस्वती की पूजा करते हैं। पीले फूल और भोग चढ़ाए जाते हैं और “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जाप किया जाता है। खास बात यह है कि इस दिन नए काम, पढ़ाई, लेखन या शिक्षा से जुड़े कार्य शुरू करने से सफलता मिलने की मान्यता है। जरूरतमंदों को शिक्षा सामग्री दान करना भी शुभ माना जाता है।

आचार्य सोम प्रकाश शास्त्री के अनुसार, मौनी अमावस्या के बाद बसंत ऋतु आती है, जो हल्की ठंडी और सुखद होती है। इस समय हल्का पीतांबरी वस्त्र पहनना चाहिए। साल में केवल छह ऐसी तिथियां होती हैं, जिनमें विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या भूमि पूजन जैसे कार्य आसानी से किए जा सकते हैं। इसलिए बसंत पंचमी को विशेष रूप से शुभ दिन माना गया है।

छात्र पीले वस्त्र पहनकर मां सरस्वती की आराधना करें, महिलाएं भगवान विष्णु की प्रार्थना करें और कन्याएं भगवती लक्ष्मी की पूजा करें। इस दिन नए कार्य शुरू करने से सालभर शुभ फल मिलने की मान्यता है


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