नोएडा में हाल ही में इंजीनियर युवराज मेहता की खुले नाले में गिरकर हुई मौत की घटनाएं अभी चर्चा में थीं कि मेरठ में भी एक और दर्दनाक हादसा सामने आया। शहर के व्यस्ततम इलाके आबूलेन पर स्थित खुले नाले में एक ई-रिक्शा चालक गिर गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना न केवल परिवार के लिए त्रासदी साबित हुई, बल्कि नगर निगम और कैंट बोर्ड प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आबूलेन का यह खुला नाला लंबे समय से हादसों की दावत दे रहा है। बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यही लापरवाही एक गरीब ई-रिक्शा चालक की जान ले गई।
हादसे के बाद मौके पर पहुंचे लोग और पड़ोसी प्रशासन की ‘कुंभकर्णी नींद’ पर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। उनका कहना है कि नोएडा की घटना के बावजूद मेरठ प्रशासन ने सुरक्षा के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए, जिसका खामियाजा इस परिवार को भुगतना पड़ा।
विशेषज्ञों और नागरिकों का मानना है कि शहर में खुले नालों और खतरनाक जगहों पर तत्काल सुधार और सुरक्षा उपाय लागू करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि और जान-माल का नुकसान रोका जा सके।
मेरठ में यह हादसा प्रशासन की लापरवाही का ताजा उदाहरण बन गया है और अब सवाल उठ रहा है कि आखिर कब तक प्रशासन खुले नालों और खतरे की चेतावनी को नजरअंदाज करता रहेगा।
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