रामायण फिल्म के ट्रेलर पर उठे सवाल, सेंसर से पहले विशेषज्ञों को दिखाने की मांग
नई दिल्ली, योगराज शर्मा। रामायण रिसर्च काउंसिल द्वारा शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित नेशनल स्पोर्ट्स क्लब ऑफ इंडिया (NSCI), प्रगति मैदान में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान काउंसिल ने "रामायणी सम्मान 2026" के आयोजन, रामायण से जुड़े विभिन्न प्रकल्पों तथा समसामयिक विषयों पर अपनी जानकारी और विचार साझा किए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अजय भट्ट (सांसद, नैनीताल एवं पूर्व रक्षा राज्य मंत्री), देव दत्त शर्मा (सेवानिवृत्त आईएएस), डॉ. भारत नागर (सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता), कुमार सुशांत, पितांबर मिश्रा तथा साध्वी प्रज्ञा भारती प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
काउंसिल ने बताया कि "रामायणी सम्मान 2026" का आयोजन 19 अगस्त 2026 को काशी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती के अवसर पर किया जाएगा। इस समारोह में देशभर से चयनित 28 विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाएगा।
सीतामढ़ी में बन रहा मां सीता शक्ति स्थल
काउंसिल ने जानकारी दी कि बिहार सरकार द्वारा सीतामढ़ी में 12 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है, जहां मां सीता (शक्ति स्थल) मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमि पूजन अप्रैल 2026 में बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा किया जा चुका है।
रामायण फिल्म के ट्रेलर पर डॉ. भारत नागर की प्रतिक्रिया
मीडिया के प्रश्नों का उत्तर देते हुए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. भारत नागर ने हाल ही में जारी "रामायण" फिल्म के ट्रेलर पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ट्रेलर देखने के बाद उन्हें यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि यह रामायण पर आधारित फिल्म है या महाभारत, क्योंकि उनके अनुसार भगवान श्रीराम का चित्रण पारंपरिक मर्यादा एवं सौम्यता के अनुरूप प्रतीत नहीं होता।
उन्होंने सुझाव दिया कि फिल्म को सेंसर प्रमाणन से पहले रामायण रिसर्च काउंसिल के विद्वानों को भी दिखाया जाए, ताकि यदि कोई तथ्यात्मक या सांस्कृतिक त्रुटि हो तो उसे समय रहते सुधारा जा सके। उन्होंने कहा कि पूर्व में आई फिल्म "आदिपुरुष" को लेकर भी विवाद सामने आए थे और ऐसी परिस्थितियों से बचना आवश्यक है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत न हों तथा नई पीढ़ी तक सही जानकारी पहुंचे।
फिल्म निर्माण से पहले शोध की आवश्यकता: अजय भट्ट
सांसद एवं पूर्व रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने कहा कि रामायण रिसर्च काउंसिल की स्थापना का उद्देश्य रामायण से जुड़ी प्रमाणिक एवं सही जानकारी समाज तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक एवं ऐतिहासिक विषयों पर फिल्म बनाने वाले निर्माताओं को व्यापक शोध के बाद ही निर्माण कार्य करना चाहिए, ताकि किसी प्रकार की भ्रामक जानकारी लोगों तक न पहुंचे।
उन्होंने "रामायणी सम्मान 2026" के लिए चयनित प्रमुख सम्मानित हस्तियों के नामों की भी घोषणा की, जिनमें अनूप जलोटा, अनुराधा पौडवाल, आर. के. सिंह तथा स्वर्गीय किशोर कुणाल शामिल हैं।
माता सीता के चरित्र को सही रूप में प्रस्तुत करने की अपील
साध्वी प्रज्ञा भारती ने कहा कि फिल्मों में कई बार माता सीता के चरित्र को कमजोर या असहाय रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जबकि भारतीय परंपरा में माता सीता त्याग, धैर्य, शक्ति और आदर्श नारीत्व का प्रतीक हैं। उन्होंने फिल्म निर्माताओं से आग्रह किया कि उनके चरित्र का चित्रण गरिमापूर्ण और तथ्यपरक तरीके से किया जाए।
भारतीय संस्कृति के संरक्षण का उद्देश्य
काउंसिल के पदाधिकारियों ने बताया कि "रामायणी सम्मान" का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, रामायण परंपरा और नैतिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों तक प्रमाणिक जानकारी पहुंचाना है।

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