Saturday, 24 January 2026

क्षिप्रा तट पर हुआ था मंगल ग्रह का जन्म, जानिए मंगलनाथ मंदिर की अनसुनी पौराणिक कथा


 धार्मिक नगरी उज्जैन को आमतौर पर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां स्थित मंगलनाथ मंदिर भी उतना ही पवित्र और रहस्यमयी माना जाता है। क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित यह मंदिर खासतौर पर उन श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है, जिनकी कुंडली में मंगल ग्रह का प्रभाव अधिक होता है या जो मंगल दोष से पीड़ित होते हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, उज्जैन को मंगल ग्रह की जननी कहा गया है। कहा जाता है कि यहीं क्षिप्रा नदी के किनारे मंगल ग्रह का जन्म हुआ था। इसी कारण इस मंदिर को मंगल ग्रह की शांति और दोष निवारण का सबसे प्रमुख स्थल माना जाता है। देशभर से लोग यहां मंगल शांति, भात पूजा और विशेष अनुष्ठान कराने पहुंचते हैं।

मंगलनाथ मंदिर की एक और खास बात इसका खगोलीय महत्व है। यह मंदिर कर्क रेखा पर स्थित है और मान्यता है कि भारत में यह इकलौता ऐसा स्थान है, जहां से कर्क रेखा गुजरती है। इसी वजह से उज्जैन को देश का नाभि स्थल भी कहा जाता है। प्राचीन काल में खगोल शास्त्र और ग्रहों की गणना के लिए यह स्थान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता था।

यहां मंगल देव की पूजा भगवान शिव के रूप में की जाती है, क्योंकि धार्मिक ग्रंथों में मंगल को भगवान शिव और पृथ्वी का पुत्र माना गया है। मान्यता है कि सच्चे मन से यहां पूजा करने से विवाह बाधा, भूमि विवाद और जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है। 

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