Tuesday, 20 January 2026

लेजर शील्ड से लैस होगा भारत: बिना गोला-बारूद दुश्मन को निष्क्रिय करने की तैयारी

 भारत अपनी वायु और मिसाइल रक्षा क्षमता में ऐतिहासिक छलांग लगाने की ओर बढ़ रहा है। 15 अगस्त के संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के तहत देश का अपना व्यापक नेशनल एयर डिफेंस सिस्टम तैयार किया जा रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) इस दिशा में अत्याधुनिक हाई-एनर्जी लेजर आधारित एयर एंड मिसाइल डिफेंस सिस्टम विकसित कर रहा है, जो बिना पारंपरिक हथियारों के हवाई खतरों को नष्ट करने में सक्षम होगा।

यह प्रणाली 300 किलोवाट श्रेणी के हाई-एनर्जी लेजर पर आधारित होगी, जिसकी प्रभावी रेंज 20 किलोमीटर से अधिक मानी जा रही है। यह ड्रोन, क्रूज मिसाइल, लोइटरिंग म्यूनिशन और यहां तक कि लड़ाकू विमानों जैसे खतरों को सटीकता से निशाना बना सकेगी। खास बात यह है कि इसमें प्रति शॉट लागत बेहद कम होगी और यह पारंपरिक जामिंग या इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेज़र्स से अप्रभावित रहेगी।

DRDO ने इस परियोजना के लिए जरूरी कई प्रमुख तकनीकों का सफल परीक्षण कर लिया है, जिनमें एडवांस्ड बीम डायरेक्शन सिस्टम, थर्मल कंट्रोल मैकेनिज्म और लॉन्ग रेंज ट्रैकिंग असेंबली शामिल हैं। यह सिस्टम बदलते मौसम, धूल-धुएं और वायुमंडलीय बाधाओं के बीच भी प्रभावी ढंग से काम कर सकेगा।

समानांतर रूप से भारत अपने मौजूदा एयर डिफेंस ढांचे को मजबूत करने के लिए आकाश-NG और S-400 सिस्टम भी तैनात कर रहा है, जबकि भविष्य में रूसी S-500 खरीदने की संभावना पर भी विचार चल रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, लेजर आधारित रक्षा तकनीक भविष्य के युद्ध का मुख्य आधार बनने जा रही है और भारत इस क्षेत्र में चुनिंदा उन्नत देशों की कतार में शामिल हो रहा है।

 

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